Heart Touching Nasheed - Duaa Hai Tujh Se - Mumtaz Usmani - New Naat 2026

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अश्लीलता को मिटाने के लिए इस्लामी शरिया के पुख्ता इंतज़ामात

अश्लीलता को मिटाने के लिए इस्लामी शरिया के पुख्ता इंतज़ामात

शरीयते इस्लामिया ने दुनिया से फ़ह्हाशी (अश्लीलता/बेहयाई) को मिटाने के लिए जो मोहकम (पुख़्ता) इंतज़ामात फ़रमाए हैं, उनका अगर ख़ुलासा (संक्षेप) किया जाए तो तरतीब वार (क्रमशः) दर्ज-ज़ैल उनवानात (शीर्षकों) में उन्हें समेटा जा सकता है: (1) क़ुरआन व हदीस में वा'द व वईद (पुरस्कार के वादे और सज़ा की चेतावनी) के ज़रिए फ़ह्हाशी के ख़िलाफ़ ज़ेहन-साज़ी (मानसिकता बनाना)। (2) औरतों के बिना ज़रूरत घर से बाहर निकलने पर रोक। (3) औरतों को परदे का हुक्म। (4) अजनबी (ग़ैर-महरम) मर्दों और औरतों के लिए नज़रें झुकाने का हुक्म। (5) अजनबी मर्द व औरत में तन्हाई (एकांत) की मनाही। (6) अजनबी मर्द व औरत के एक साथ सफ़र करने की मनाही। (7) अजनबी मर्द व औरत के बीच नर्म और बे-तकल्लुफ़ (बिना संकोच) गुफ़्तगू की मनाही। (8) हलाल रास्ता अपनाने और निकाह करने की ताकीद (ज़ोर देना)। (9) फ़वाहिश (अश्लील चीज़ों) के नश्रो-इशाअत (प्रसार और प्रचार) की मनाही। (10) ज़िना (व्यभिचार) के सुबूत पर सख़्त सजाएं। दुनिया का तजुर्बा है कि जब और जहाँ इफ़्फ़त व इस्मत (पवित्रता और शील) के तहफ़्फ़ुज़ (सुरक्षा) का मज़कूरा (उपरोक्त) निज़ाम नाफ़िज़ (लागू) किया गया, वहाँ पाकीज़गी, पाकबाज़ी और इफ़्फ़त-माबी (सदाचार) के ऐसे ख़ुशनुमा मंज़र देखने को मिले कि दुनिया हैरतज़दा रह गई। आज हज़ारों ख़राबियों के बावजूद और फ़ह्हाशी के असबाब (साधन) घर-घर मौजूद होने के बावजूद, इफ़्फ़त-माबी का तनासुब (अनुपात) इस्लाम से निस्बत (संबंध) रखने वालों में अलहम्दुलिल्लाह दूसरों से बहुत ज़्यादा है। लेकिन चूँकि फ़ज़ाओं में बेहयाई का ज़हर ख़तरनाक हद तक बढ़ता जा रहा है, इसलिए इत्मीनान से बैठने का मौक़ा नहीं है; बल्कि बेदार-मग़्ज़ (जागरूक), मोहतात (सतर्क) और होशियार रहने की ज़रूरत है। (किताब: एक जामे क़ुरआनी वाज़ पृष्ठ संख्या: 275-276 लेखक: मुफ़्ती मोहम्मद सलमान साहब मन्सूरपुरी ज़ैद मज्दुहू चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)