احادیث مبارکہ

एक इबरतनाक जुर्म की दास्तान और मां की ममता
लेख

एक इबरतनाक जुर्म की दास्तान और मां की ममता

हज़रत मालिक बिन दीनार (अल्लाह उन पर रहम करे) फ़रमाते हैं: "मैंने अपने जीवन में 60 हज किए। एक हज के मौक़े पर मैंने मक्का मुकर्रमा में असाधारण भीड़ देखी, जहाँ लाखों लोगों का एक अज़ीम-ओ-शान मजमा (जमावड़ा) था। लाखों की इस भीड़ को देखकर अचानक मेरे दिल में यह ख़याल आया और मैंने दिल ही दिल में अल्लाह से इल...

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