हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ:‏‏‏‏ إِنْ كُنَّا آَلَ مُحَمَّدٍ نَمْكُثُ شَهْرًا مَا نَسْتَوْقِدُ بِنَارٍ إِنْ هُوَ إِلَّا الْمَاءُ وَالتَّمْرُ(ترمذی:۲۴۷۱)
अनुवाद
हज़रत आइशा (रज़ि.) फ़रमाती हैं: हम आले मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसे थे कि एक-एक महीना चूल्हा नहीं जलाते थे, हमारा गुज़र-बसर सिर्फ़ खजूर और पानी पर होता था।
एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...