قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " أَلاَ أَدُلُّكُمْ عَلَى أَهْلِ الْجَنَّةِ، كُلُّ ضَعِيفٍ مُتَضَعَّفٍ، لَوْ أَقْسَمَ عَلَى اللَّهِ لأَبَرَّهُ، وَأَهْلِ النَّارِ كُلُّ جَوَّاظٍ عُتُلٍّ مُسْتَكْبِرٍ ".(بُخاری شریف۔ ۶۶۵۷)
अनुवाद
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पूछा: "क्या मैं तुमको जन्नती न बतलाऊँ? (वह) हर कमज़ोर, कमज़ोर गरदाना हुआ है, अगर अल्लाह पर क़सम खा ले तो अल्लाह तआला ज़रूर उसकी क़सम पूरी करें (और अल्लाह की सिफ़ात बन्दों को अपनानी चाहिए, इसी लिए अब्रार-अल-मुक़सिम मुस्तहब है) और क्या मैं तुम्हें दोज़ख़ी न बतलाऊँ? वह हर अक्खड़ मिज़ाज, अकड़ कर चलने वाला, घमंडी है!" (तोहफ़त-उल-क़ारी)