عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: مَنْ أَتَى كَاهِنًا ، قَالَ مُوسَى فِي حَدِيثِهِ: فَصَدَّقَهُ بِمَا يَقُولُ ثُمَّ اتَّفَقَا أَوْ أَتَى امْرَأَةً، قَالَ مُسَدَّدٌ: امْرَأَتَهُ حَائِضًا أَوْ أَتَى امْرَأَةً، قَالَ مُسَدَّدٌ: امْرَأَتَهُ فِي دُبُرِهَا فَقَدْ بَرِئَ مِمَّا أُنْزِلَ عَلَى مُحَمَّدٍ(ابو داؤد : ۳۹۰۴)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जो शख्स किसी काहिन (ज्योतिषी/भविष्यवक्ता) के पास गया जो ग़ैब की ख़बरें देता हो और फिर उसकी तस्दीक (सत्यता की पुष्टि) की, या अपनी बीवी के पास उसके अय्यामे हैज़ (मासिक धर्म) में गया, या उसकी दुबुर (गुदा) में मुबाशरत की, तो वह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल करदा दीन से बरी (अलग) हुआ।"