हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने फरमाया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "नमाज़ जन्नत की कुंजी है, और नमाज़ की कुंजी वुज़ू है।"
दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज...