हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ أَوَّلَ مَا فُرِضَتْ الصَّلَاةُ رَكْعَتَيْنِ فَأُقِرَّتْ صَلَاةُ السَّفَرِ وَأُتِمَّتْ صَلَاةُ الْحَضَرِ(نسائی: ۴۵۴)
अनुवाद
हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा से मनक़ूल है कि शुरू-शुरू में नमाज़ दो रकात फ़र्ज़ हुई थी, फिर सफ़र की नमाज़ इसी तरह रहने दी गई और हज़र (इक़ामत) की नमाज़ (चार रकात) मुकम्मल कर दी गई।
निष्कपटता की मिसाल
लेख

निष्कपटता की मिसाल

जब हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने मदायन को फ़तह (विजय) किया, तो उन्होंने ऐलान करवाया कि जिस मुजाहिद (योद्धा) के पास जो भी माल-ए-ग़नीमत (युद्ध की सामग्री) है, वह सब लाकर एक जगह जमा करवाए ताकि हम उसे तक़्सीम (वितरित) कर सकें। लोग माल-ए-ग़नीमत जमा करवाने लग गए। तीन दिन गुज़र गए और ऐस...

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