मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना कि जहन्नम से बचो अगरचे खजूर का एक टुकड़ा दे कर ही सही (यानी सदक़ा कर के दोज़ख की आग से बचने की ज़रूर कोशिश करो)।
मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्लाह वाले लगातार अल्लाह के हुज़ूर दुआएं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं और हालात बद से बदतर...