हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : كُلُّ الْمُسْلِمِ عَلَى الْمُسْلِمِ حَرَامٌ ، دَمُهُ ، وَمَالُهُ ، وَعِرْضُهُ(ابن ماجہ:۳۹۳۳)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "हर मुसलमान दूसरे के लिए क़ाबिले एहतराम (सम्माननीय) है, यानी उसकी जान, उसका माल और उसकी आबरू।"
दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी
लेख

दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

शागिर्द (छात्र) ग़ौर से सुन रहा था। उस्ताद (शिक्षक) ने पूछा, "अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, "4।" उस्ताद को लगा कि शायद शागिर्द सवाल ठीक से समझ नहीं पाया। उस्ताद ने इत्मीनान से दोबारा पूछा... "देखो...