हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फितराने के बारे में यह हुक्म दिया कि इसे लोगों के ईद की नमाज़ की तरफ निकलने से पहले अदा कर दिया जाए।
मुअतसिम बिल्लाह के बाद उनका बेटा वासिक़ बिल्लाह 227 हिजरी में राजसिंहासन (ताज-ओ-तख़्त) का वारिस बना। वह गुमराह करने वाले विचारों और अक़ीदों का मालिक था और मोतज़ली (Mu'tazilite) अक़ीदों, विशेष रूप से 'ख़ल्क़-ए-क़ुरआन' (क़ुरआन के मख़्लूक़ होने) के अक़ीदे के प्रचार-प्रसार में अपने बाप से भी आगे बढ़ गया...