हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:‏‏‏‏ لَا يَفْقَهُ مَنْ قَرَأَ الْقُرْآنَ فِي أَقَلَّ مِنْ ثَلَاثٍ(ابو داؤد:۱۳۹۴)
अनुवाद
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ि.) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जिस शख़्स ने तीन दिन से कम में क़ुरआन पढ़ा उसने इसे समझा ही नहीं।"
दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)
लेख

दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)

लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...

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