हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُمَا، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: الشَّهْرُ تِسْعٌ وَعِشْرُونَ، فَإِذَا رَأَيْتُمُ الْهِلَالَ فَصُومُوا، وَإِذَا رَأَيْتُمُوهُ فَأَفْطِرُوا، فَإِنْ غُمَّ عَلَيْكُمْ فَاقْدِرُوا لَهُ(مسلم:۱۰۸۰)
अनुवाद
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से मरवी है, उन्होंने कहा: रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "महीना उन्तीस का भी होता है, जब चाँद देख लो तो रोज़ा रखो और जब इसे देख लो तो रोज़े ख़त्म करो, अगर तुम पर बादल छा जाएँ तो इसकी गिनती पूरी करो।"
क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला
लेख

क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला

एक रियासत में एक बूढ़े शख़्स को रोटी चोरी करते हुए पकड़ा गया। इलाक़े के कुछ लोग उसे पकड़कर वक़्त के क़ाज़ी (जज) के पास ले गए। क़ाज़ी ने बूढ़े बाबा से काफ़ी सवाल किए, लेकिन बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया। आख़िरकार क़ाज़ी ने फ़ैसला इस तरह सुनाया: "बाबा जी रोटी चोरी करने के जुर्म में एक दिरहम तंदूर के...

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