नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "नहीं इल्ज़ाम लगाता कोई किसी पर फ़िस्क़ का और नहीं इल्ज़ाम लगाता उस पर कुफ़्र का मगर पलट जाता है वह इल्ज़ाम उस पर अगर नहीं होता है वह शख़्स जिस पर इल्ज़ाम लगाया गया है ऐसा!" (तोहफ़त-उल-क़ारी)
लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया:
"मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...