हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَسَحَّرُوا فَإِنَّ فِي السَّحُورِ بَرَكَةً(نسائی:۲۱۴۹)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से मरवी है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "सहरी खाया करो, बिलाशुब्हा सहरी खाने में बरकत है।"
फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य
लेख

फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य

फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के मौक़े पर जगह-जगह हुज़ूर रहमतुल लिल आलमीन ﷺ (सारे संसार के लिए दया होने) के जलवे नज़र आते हैं। बल्कि वास्तविकता यह है कि मक्का की विजय का सबसे बड़ा कारण ही वह घटना बनी जिसने आपके दर्दभरे और मानवता-प्रेमी दिल को तड़पा दिया था। सीरत-निगार (जीवनी लेखक) लिखते हैं: सन् ६...