عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، قَالَ : قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : مَنْ لَمْ يَدَعْ قَوْلَ الزُّورِ وَالْعَمَلَ بِهِ ، فَلَيْسَ لِلَّهِ حَاجَةٌ فِي أَنْ يَدَعَ طَعَامَهُ وَشَرَابَهُ(بُخاری:۱۹۰۳)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) ने फ़रमाया कि रसूले करीम (ﷺ) ने फ़रमाया, अगर कोई शख़्स झूठ बोलना और दग़ाबाज़ी करना (रोज़े रखकर भी) न छोड़े तो अल्लाह तआला को इसकी कोई ज़रूरत नहीं कि वह अपना खाना-पीना छोड़ दे।