हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि हम लोग रसूलुल्लाह (ﷺ) के साथ रमज़ान में सफ़र करते तो न आप रोज़ा रखने वाले के रोज़ा रखने पर नकीर करते और न ही रोज़ा न रखने वाले के रोज़ा न रखने पर।
शेख़-उल-हदीस हज़रत मौलाना मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब (दामत बरकातुहुम) अपनी मशहूर तस्नीफ़ "उलूम-उल-क़ुरआन" में लिखते हैं:
"यह पांच तफ़सीरें (यानी तफ़सीर-ए-कबीर, तफ़सीर इब्न कसीर, तफ़सीर-ए-क़ुर्तुबी, तफ़सीर रूह-उल-मआनी और तफ़सीर-ए-कश्शाफ़) अहक़र (इस नाचीज़) के मामूली ज़ौक़ के मुताबिक ऐसी हैं कि अगर...