عَنْ جَابِرٍ، قَالَ: أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ النُّعْمَانُ بْنُ قَوْقَلٍ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ أَرَأَيْتَ إِذَا صَلَّيْتُ الْمَكْتُوبَةَ، وَحَرَّمْتُ الْحَرَامَ، وَأَحْلَلْتُ الْحَلَالَ، أَأَدْخُلُ الْجَنَّةَ؟ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: نَعَمْ(مسلم شریف:۱۰۸)
अनुवाद
हज़रत जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) के पास नोमान बिन क़ौक़ल (रज़ि.) आए और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आप क्या फ़रमाते हैं कि जब मैं फ़र्ज़ नमाज़ अदा करूँ, हराम को हराम और हलाल को हलाल समझूँ तो क्या मैं जन्नत में दाख़िल हो जाऊँगा? नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "हाँ!"