عَنِ الأَسْوَدِ قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ مَا كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَصْنَعُ فِي أَهْلِهِ قَالَتْ كَانَ فِي مِهْنَةِ أَهْلِهِ، فَإِذَا حَضَرَتِ الصَّلاَةُ قَامَ إِلَى الصَّلاَةِ(بُخاری شریف ۶۰۳۹)
अनुवाद
असवद बिन यज़ीद (रहिमहुल्लाह) ने हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से पूछा: "नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब घर में होते थे तो क्या करते थे?" हज़रत सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहा: "घर वाले जो काम करते थे वही आप भी करते थे, यानी घर के काम काज में शरीक होते थे, फिर जब नमाज़ की तकबीर होती तो आप काम छोड़कर नमाज़ के लिए तशरीफ़ ले जाते। (यह भी इंतिहाई तवाज़ो की अलामत है।)" (तोहफ़त-उल-क़ारी)