हदीस अल-रसूल ﷺ

سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كَانَ الْحَرُّ أَبْرَدَ بِالصَّلَاةِ وَإِذَا كَانَ الْبَرْدُ عَجَّلَ(نسائی شریف: ۵۰۰)
अनुवाद
हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) बयान करते हैं कि जब गर्मी होती तो रसूलल्लाह (ﷺ) नमाज़े ज़ुहर को ठंडी करके पढ़ते थे और जब सर्दी होती तो जल्दी पढ़ते।
आधुनिक सुख-सुविधाएं और राजा-महाराजा: कृतज्ञता का पाठ
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