हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:‏‏‏‏ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي يُقَاتِلُونَ عَلَى الْحَقِّ ظَاهِرِينَ عَلَى مَنْ نَاوَأَهُمْ حَتَّى يُقَاتِلَ آخِرُهُمُ الْمَسِيحَ الدَّجَّالَ(ابو داؤد شریف : ۲۴۸۴)
अनुवाद
हज़रत इमरान बिन हुसैन (रज़ि.) का बयान है, रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "मेरी उम्मत का एक गिरोह हमेशा हक़ के लिए क़िताल करता रहेगा और वह अपने मुक़ाबिल आने वालों पर ग़ालिब रहेंगे हत्ता कि उनका आख़िरी गिरोह मसीह दज्जाल से लड़ाई करेगा।"
सच्चे मौलवी (अल्लाह वाले) की पहचान
लेख

सच्चे मौलवी (अल्लाह वाले) की पहचान

अगर किसी ख़ैमे (तंबू) पर लिखा हो 'ख़ैमा-ए-लैला' (लैला का तंबू) लेकिन उसमें झाँक कर देखा तो अंदर कुत्ता बँधा हुआ है, तो उस ख़ैमे की कोई क़द्र नहीं होगी बल्कि लोग मज़ाक उड़ाएंगे। इसी तरह मौलवी वह है जो 'मौला' (अल्लाह) वाला हो। उसके ख़ैमे से मौला की ख़ुशबू मिलनी चाहिए, यानी उसकी सोहबत (संगति) में अल...

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