हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ، قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: مَنْ تَوَضَّأَ لِلصَّلَاةِ فَأَسْبَغَ الْوُضُوءَ، ثُمَّ مَشَى إِلَى الصَّلَاةِ الْمَكْتُوبَةِ، فَصَلَّاهَا مَعَ النَّاسِ أَوْ مَعَ الْجَمَاعَةِ أَوْ فِي الْمَسْجِدِ غَفَرَ اللهُ لَهُ ذُنُوبَهُ(مسلم:۲۳۲/کتاب الطھارۃ)
अनुवाद
हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान (रज़ि.) से रिवायत है कि मैंने रसूलल्लाह (ﷺ) को फ़रमाते हुए सुना: "जिसने नमाज़ के लिए वज़ू किया और वज़ू की तकमील की, फिर फ़र्ज़ नमाज़ के लिए चल कर गया और लोगों के साथ या जमाअत के साथ नमाज़ अदा की या मस्जिद में नमाज़ पढ़ी, अल्लाह तआला उसके गुनाह माफ़ कर देगा।"
पिता का शिक्षाप्रद उत्तर
लेख

पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

अबुल कलाम कहते हैं: एक रात खाने के समय मेरी माँ ने सालन (सब्ज़ी) और जली हुई रोटी मेरे पिता के आगे रख दी। मैं पिता की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता रहा कि शायद वह ग़ुस्से का इज़हार करेंगे, लेकिन उन्होंने बेहद सुकून से खाना खाया और साथ ही मुझसे पूछा कि आज स्कूल में मेरा दिन कैसा गुज़रा? मुझे याद न...

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