أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ، قَالَ إِنَّ جُبَيْرَ بْنَ مُطْعِمٍ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ النَّبِيَّ ﷺ يَقُولُ " لاَ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَاطِعٌ "(بُخاری شریف ۵۹۸۴)
अनुवाद
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "क़तअ-ए-रहमी करने वाला जन्नत में नहीं जाएगा!" यानी रिश्तेदारों के साथ बुरा सलूक करना निहायत संगीन गुनाह है, कोई शख़्स इस गुनाह की गंदगी के साथ जन्नत में नहीं जा सकेगा, हाँ सज़ा पाकर या माफ़ी मिल जाए तो दूसरी बात है। (तोहफ़त-उल-क़ारी)