हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:‏‏‏‏ رِضَا الرَّبِّ فِي رِضَا الْوَالِدِ، ‏‏‏‏‏‏وَسَخَطُ الرَّبِّ فِي سَخَطِ الْوَالِدِ(ترمذی: ۱۹۰۰)
अनुवाद
नबी अकरम (ﷺ) ने फ़रमाया: "रब की रज़ा वालिद की रज़ा में है और रब की नाराज़गी वालिद की नाराज़गी में है।"
दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)
लेख

दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)

लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...

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