हज़रत अबू मसऊद अंसारी (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जिसने रात में सूरह अल-बक़रा की आख़िरी दो आयतें पढ़ीं वह उसके लिए काफ़ी हो गईं।"
हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा था कि थानेदार की कमाई मुश्तबा (संदिग्ध) और मशकूक है, इस वजह से उसकी दावत को नामंज़ूर फ़रमा दिया।
थानेदार ने दावत क़ब...