हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا عَطَسَ غَطَّى وَجْهَهُ بِيَدِهِ أَوْ بِثَوْبِهِ وَغَضَّ بِهَا صَوْتَهُ(ترمذی: ۲۷۴۵)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि नबी अकरम (ﷺ) को जब छींक आती थी तो अपने हाथ से या अपने कपड़े से मुँह ढांप लेते, और अपनी आवाज़ को धीमी करते।
रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)
लेख

रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)

अल्लामा इब्न-ए-हजर हैतमी रहमतुल्लाही अलैहि की किताब है "अज़-ज़वाज़िर अन इक़्तिराफ़िल कबाइर"। इसमें उन्होंने एक वाक़िया लिखा है: एक शख़्स हज के इरादे से गया और जब हज करने लगा तो उसने मक्का में पूछा कि सबसे अमानतदार शख़्स कौन है? तो बतलाया गया कि फ़लाँ शख़्स है। तो वह उसके पास गया और अपने एक हज़ार दीन...

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