عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " لاَ يُقِيمُ الرَّجُلُ الرَّجُلَ مِنْ مَجْلِسِهِ، ثُمَّ يَجْلِسُ فِيهِ "(بُخاری شریف : ۶۲۶۹)
अनुवाद
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "कोई किसी को उसकी जगह से न उठाए, फिर वह ख़ुद उस जगह में बैठे (बल्कि अहल-ए-मजलिस से दरख़्वास्त करे कि वे खुल जाएँ और गुंजाइश पैदा करें)।" (तोहफ़त-उल-क़ारी)
बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!)
नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज्ञान) के तलबा (विद्यार्थी) हैं।
इल्मे शरई (धार्मिक ज्ञान) को अल्लाह तआला ने 'कौले थक़ील' (एक भारी बात) क़रार दिया है। य...