हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ شَرِبَ النَّبِيذَ مِنْكُمْ فَلْيَشْرَبْهُ زَبِيبًا فَرْدًا أَوْ تَمْرًا فَرْدًا أَوْ بُسْرًا فَرْدًا(مسلم:۱۹۸۷)
अनुवाद
हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (नबीज़ बनाते हुए) सूखी खजूरों और किशमिश को मिलाने से, और पकी हुई खजूरों और कच्ची खजूरों को मिलाने से मना फ़रमाया।
नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत
लेख

नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आयत थी: "इन्नल इंसाने ख़ुलिक़ा हलूआ" (बेशक इंसान बहुत कम हौसला पैदा किया गया है) हक़ीक़त यह है कि इंसान में सब्र और...