हदीस अल-रसूल ﷺ

أَنّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْلَمَ عَلَى صَفِيَّةَ بِنْتِ حُيَيٍّ بِسَوِيقٍ وَتَمْرٍ (ترمذی: ۱۰۹۵)
अनुवाद
नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सफ़िय्या बिन्ते हुयय का वलीमा सत्तू और खजूर से किया।
ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
लेख

ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?

बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम की कुन्नियत है) "आप नमाज़ किस तरह अदा करते हैं?" हातिम रहमतुल्लाह अलैह ने उनकी ओर मुतवज्जोह होकर फ़रमाया: "जब नमाज़ का...

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