وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: الصَّلَوَاتُ الْخَمْسُ وَالْجُمُعَةُ إِلَى الْجُمُعَةِ وَرَمَضَانُ إِلَى رَمَضَانَ مُكَفِّرَاتٌ لَمَّا بَيْنَهُنَّ إِذَا اجْتُنِبَتِ الْكَبَائِر . رَوَاهُ مُسلم(مشکوٰۃ: ۵۶۴)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया: "जब कबीरा (बड़े) गुनाहों से बचा जाए, तो पाँच नमाज़ें, एक जुमा से दूसरे जुमे तक, और एक रमज़ान से दूसरे रमज़ान तक होने वाले सगीरा (छोटे) गुनाहों का कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) हैं।"