हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ تُزَوَّجَ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا أَوْ عَلَى خَالَتِهَا(ترمذی: ۱۱۲۵)
अनुवाद
नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मना फ़रमाया कि किसी औरत से शादी की जाए और उसकी फूफी या उसकी खाला (पहले से) निकाह में हो।
दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)
लेख

दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)

लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...