عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ: كُنْتُ أُصَلِّي الظُّهْرَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَآخُذُ قَبْضَةً مِنَ الْحَصَى لِتَبْرُدَ فِي كَفِّي أَضَعُهَا لِجَبْهَتِي أَسْجُدُ عَلَيْهَا لِشِدَّةِ الْحَرِّ (ابو داؤد: ۳۹۹)
अनुवाद
हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फरमाते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ज़ुहर की नमाज़ पढ़ा करता था, तो अपनी मुट्ठी में कंकड़ियाँ उठा लेता ताकि वे ठंडी हो जाएँ और उन्हें अपनी पेशानी के नीचे रखकर सजदा कर सकूँ और यह सख्त गर्मी के कारण होता था।