हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَنَسٍ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ (بُخاری شریف: ۱۳)
अनुवाद
हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया: तुम में से कोई व्यक्ति (पूर्ण) ईमान वाला नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए वही न चाहे जो वह अपने लिए चाहता है।
बच्चों को मस्जिदों से दूर न करें
लेख

बच्चों को मस्जिदों से दूर न करें

आज के दौर में जब सामाजिक बदलाव और आधुनिक तकनीक (टेक्नोलॉजी) का दबदबा बढ़ता जा रहा है, बच्चों के लिए मोबाइल, टीवी और अन्य मनोरंजन के साधनों में व्यस्त होना आसान हो गया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया की वजह से वे घर बैठे ही दुनिया भर की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। लेकिन इसके साथ ही यह भी एक हक़ीक़त...

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