हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: مَنِ اقْتَطَعَ حَقَّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ بِيَمِينِهِ، فَقَدْ أَوْجَبَ اللهُ لَهُ النَّارَ، وَحَرَّمَ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ: وَإِنْ كَانَ شَيْئًا يَسِيرًا يَا رَسُولَ اللهِ؟ قَالَ: وَإِنْ قَضِيبًا مِنْ أَرَاكٍ (مسلم شریف : ۳۵۳)
अनुवाद
हज़रत अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जिसने अपनी क़सम के ज़रिए से किसी मुसलमान का हक़ मारा, अल्लाह ने उसके लिए आग वाजिब कर दी और उस पर जन्नत हराम ठहराई।" एक शख्स ने आप (ﷺ) से अर्ज़ की: "अगरचे वह मामूली सी चीज़ हो, ऐ अल्लाह के रसूल!" आप (ﷺ) ने फ़रमाया: "चाहे वह पीलू के दरख़्त की एक शाख हो।"
हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) की रुस्तम से ईमान अफ़रोज़ गुफ़्तगू 🔸
लेख

हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) की रुस्तम से ईमान अफ़रोज़ गुफ़्तगू 🔸

हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) की इमारत व सरकर्दगी में एक लश्कर ईरानियों से मुक़ाबले के लिए गया, ईरानी लश्कर का सिपहसालार मशहूर ज़माना पहलवान और बहादुर ''रुस्तम'' था। हज़रत खालिद बिन वलीद (रज़ि.) ने रुस्तम की दरख्वास्त पर हज़रत रिब'ई बिन आमिर (रज़ि.) को उससे बातचीत के लिए भेजा। ईरानियों ने रुस्तम का द...

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