عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: مَنِ اقْتَطَعَ حَقَّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ بِيَمِينِهِ، فَقَدْ أَوْجَبَ اللهُ لَهُ النَّارَ، وَحَرَّمَ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ: وَإِنْ كَانَ شَيْئًا يَسِيرًا يَا رَسُولَ اللهِ؟ قَالَ: وَإِنْ قَضِيبًا مِنْ أَرَاكٍ (مسلم شریف : ۳۵۳)
अनुवाद
हज़रत अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जिसने अपनी क़सम के ज़रिए से किसी मुसलमान का हक़ मारा, अल्लाह ने उसके लिए आग वाजिब कर दी और उस पर जन्नत हराम ठहराई।" एक शख्स ने आप (ﷺ) से अर्ज़ की: "अगरचे वह मामूली सी चीज़ हो, ऐ अल्लाह के रसूल!" आप (ﷺ) ने फ़रमाया: "चाहे वह पीलू के दरख़्त की एक शाख हो।"