عَنْ صَخْرٍ الْغَامِدِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: اللَّهُمَّ بَارِكْ لِأُمَّتِي فِي بُكُورِهَا ، وَكَانَ إِذَا بَعَثَ سَرِيَّةً أَوْ جَيْشًا بَعَثَهُمْ فِي أَوَّلِ النَّهَارِ، وَكَانَ صَخْرٌ رَجُلًا تَاجِرًا وَكَانَ يَبْعَثُ تِجَارَتَهُ مِنْ أَوَّلِ النَّهَارِ فَأَثْرَى وَكَثُرَ مَالُهُ (ابو داؤد : ۲۶۰۶)
अनुवाद
हज़रत सख़र गामिदी (रज़ियल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत के लिए उनकी सुबहों में बरकत डाल दे।" चुनांचे आप (ﷺ) को कोई मुहिम या लश्कर रवाना करना होता तो उन्हें दिन के पहले पहर रवाना फ़रमाते। और हज़रत सख़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) एक ताज़िर सहाबी थे, तो वह अपने कारिंदों को दिन के पहले पहर रवाना किया करते थे, चुनांचे वह मालदार हो गए थे और उनका माल खूब बढ़ गया था।