हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، ‏‏‏‏‏‏عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ تُنْكَحُ النِّسَاءُ لِأَرْبَعٍ:‏‏‏‏ لِمَالِهَا وَلِحَسَبِهَا وَلِجَمَالِهَا وَلِدِينِهَا، ‏‏‏‏‏‏فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ تَرِبَتْ يَدَاكَ (ابو داؤد: ۲۰۴۷)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "औरतों से चार बातों की बिना पर निकाह किया जाता है। उसके माल, हसब व नसब, हुस्न व जमाल और उसके दीन की बिना पर, पस तू दीनदार को इख्तियार कर, तेरे हाथ ख़ाक आलूद हों।"
मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी
लेख

मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी

शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म (छात्र) को शरारत पर मैंने सज़ा दी, तो कुछ देर बाद मेरे हाथ ने हरकत करना छोड़ दिया और वह मुर्दा (बेजान) हो गया। मैंने...

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