हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا عَلَى الأَرْضِ أَحَدٌ يَقُولُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ وَلاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ ‏.‏ إِلاَّ كُفِّرَتْ عَنْهُ خَطَايَاهُ وَلَوْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ ‏"‏(ترمذی شریف/ باب : ابواب الدعوات)
अनुवाद
नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "ज़मीन में कोई नहीं जो कहे: ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)! वल्लाहु अकबर (और अल्लाह सबसे बड़े हैं)! वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (और कुछ ताक़त और क़ुव्वत नहीं मगर अल्लाह की मदद से), मगर इससे उसकी ख़ताएँ मिटा दी जाती हैं, अगरचे वह समन्दर के झाग के बराबर हों।" (तुहफ़त-उल-अल्मई/जि: ८)
अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर
लेख

अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर

हज़रत मौलाना यूसुफ़ बनूरी (रहमतुल्लाही अलैहि) ने एक मर्तबा एक मजलिस (सभा) में इर्शाद फ़रमाया कि: एक साल हम हज के लिए गए, वहाँ उलेमा (विद्वानों) के ग्रुप में एक रिटायर्ड फ़ौजी अफ़सर भी था। तहज्जुद के वक़्त वह फ़ौजी अफ़सर हम सब से पहले उठकर बैतुल्लाह शरीफ़ चला जाता और उस वक़्त तवाफ़ करता था। मौलाना फ...

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