عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلَا يَغْمِسْ يَدَهُ فِي وَضُوئِهِ حَتَّى يَغْسِلَهَا ثَلَاثًا فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ (سنن نسائی : ۱)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "जब तुम में से कोई नींद से बेदार हो तो अपना हाथ वुज़ू के पानी में न डाले हत्ता कि उसे तीन दफ़ा धो ले क्योंकि तुम में से कोई नहीं जानता कि उसके हाथ ने रात कहाँ गुज़ारी है। (रात भर कहाँ कहाँ लगता रहा है।)"