हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ خَرَجَتْ خَطَايَاهُ مِنْ جَسَدِهِ حَتَّى تخرج من تَحت أَظْفَاره (مشکوۃ شریف : ۲۸۴)
अनुवाद
हज़रत उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं, रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जो शख्स वुज़ू करे और खूब अच्छी तरह वुज़ू करे तो उसकी खताएं उसके जिस्म से निकल जाती हैं, हत्ता कि उसके नाखूनों के नीचे से भी निकल जाती हैं।"
हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
लेख

हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

मुदर्रिसीन (शिक्षकों) को चाहिए कि हर तालिब-ए-इल्म (छात्र) को पूरा अरबी पढ़ाना ज़रूरी न समझें, जिसके अंदर मुनासबत (योग्यता) देखें, और फ़हम-ए-सलीम (सही समझ) पाएँ, उसको सब किताबें पढ़ा दें, और जिसको मुनासबत न हो, या फ़हम-ए-सलीम न हो, उसको बक़द्रे-ज़रूरत (ज़रूरत के मुताबिक़) मसाइल पढ़ा कर कह दें कि जाओ...