हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللهُ عَنْهُمَا، قَالَ: لَا تَعِبْ عَلَى مَنْ صَامَ، وَلَا عَلَى مَنْ أَفْطَرَ، قَدْ صَامَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي السَّفَرِ وَأَفْطَرَ(مسلم: ۱۱۱۳)
अनुवाद
हज़रत इब्न अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि उन्होंने कहा: उस पर ऐब न लगाओ जिसने (सफ़र में) रोज़ा रखा और न उस पर (ऐब लगाओ) जिसने रोज़ा छोड़ा, हक़ीक़तन रसूलल्लाह (ﷺ) ने सफ़र में कभी रोज़ा रखा, और (कभी) रोज़ा छोड़ा।
सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील
लेख

सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील

हम में से किसी भी इंसान की जवानी जब ढलने लगती है और वह अधेड़ उम्र की तरफ बढ़ने लगता है, तो अमूमन बाल सफ़ेद होने शुरू होते हैं। जब बाल सफ़ेद होना अभी शुरू ही हुए हों, तब अगर किसी इंसान से पूछा जाए कि आपके बदन में कितने बाल सफ़ेद हैं? तो बहुत मुश्किल है कि वह गिनती के साथ बता सके कि इतने बाल सफ़ेद हुए...

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