हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ : مَا بَعَثَ اللَّهُ نَبِيًّا إِلَّا رَعَى الْغَنَمَ ، فَقَالَ أَصْحَابُهُ : وَأَنْتَ ؟ فَقَالَ : نَعَمْ ، كُنْتُ أَرْعَاهَا عَلَى قَرَارِيطَ لِأَهْلِ مَكَّةَ(بُخاری شریف : ۲۲۶۲)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी करीम (ﷺ) ने फ़रमाया, अल्लाह तआला ने कोई ऐसा नबी नहीं भेजा जिसने बकरियां न चराई हों। इस पर आप (ﷺ) के सहाबा रिज़वानुल्लाह अलैहिम ने पूछा, क्या आपने भी बकरियां चराई हैं? फ़रमाया कि हाँ! कभी मैं भी मक्का वालों की बकरियां चंद क़ीरात की तनख्वाह पर चराया करता था।
50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक
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50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी.................

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