عَنْ الْبَرَاءِ ، قَالَ : سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ ، فَقَالَ : إِنَّ أَوَّلَ مَا نَبْدَأُ مِنْ يَوْمِنَا هَذَا أَنْ نُصَلِّيَ ، ثُمَّ نَرْجِعَ فَنَنْحَرَ ، فَمَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَصَابَ سُنَّتَنَا(بُخاری شریف:۹۵۱)
अनुवाद
हज़रत बराअ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने फ़रमाया कि मैंने नबी करीम (ﷺ) से सुना, आप (ﷺ) ने ईद के दिन खुतबा देते हुए फ़रमाया कि पहला काम जो हम आज के दिन (ईद-उल-अज़हा) में करते हैं, यह है कि पहले हम नमाज़ पढ़ें फिर वापस आकर क़ुर्बानी करें। जिसने इस तरह किया वह हमारे तरीक़े पर चला।