हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ الْبَرَاءِ ، قَالَ : سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ ، فَقَالَ : إِنَّ أَوَّلَ مَا نَبْدَأُ مِنْ يَوْمِنَا هَذَا أَنْ نُصَلِّيَ ، ثُمَّ نَرْجِعَ فَنَنْحَرَ ، فَمَنْ فَعَلَ فَقَدْ أَصَابَ سُنَّتَنَا(بُخاری شریف:۹۵۱)
अनुवाद
हज़रत बराअ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने फ़रमाया कि मैंने नबी करीम (ﷺ) से सुना, आप (ﷺ) ने ईद के दिन खुतबा देते हुए फ़रमाया कि पहला काम जो हम आज के दिन (ईद-उल-अज़हा) में करते हैं, यह है कि पहले हम नमाज़ पढ़ें फिर वापस आकर क़ुर्बानी करें। जिसने इस तरह किया वह हमारे तरीक़े पर चला।
नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत
लेख

नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आयत थी: "इन्नल इंसाने ख़ुलिक़ा हलूआ" (बेशक इंसान बहुत कम हौसला पैदा किया गया है) हक़ीक़त यह है कि इंसान में सब्र और...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार