हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَائِشَةَ رضى الله عنها أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا أَخَذَ مَضْجَعَهُ نَفَثَ فِي يَدَيْهِ، وَقَرَأَ بِالْمُعَوِّذَاتِ، وَمَسَحَ بِهِمَا جَسَدَهُ‏(بُخاری شریف/ ص: ۶۳۱۹)
अनुवाद
हज़रत सिद्दीक़ा (रज़ि.) बयान करती हैं: नबी (ﷺ) सोते वक़्त पनाह में देने वाली आयात व सूरह पढ़ कर हाथों पर दम करते थे, और उनको अपने जिस्म पर फेरते थे। (तुहफ़त-उल-क़ारी)
मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी
लेख

मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी

शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म (छात्र) को शरारत पर मैंने सज़ा दी, तो कुछ देर बाद मेरे हाथ ने हरकत करना छोड़ दिया और वह मुर्दा (बेजान) हो गया। मैंने...

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