عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضى الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ : " مَنْ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ. فِي يَوْمٍ مِائَةَ مَرَّةٍ حُطَّتْ خَطَايَاهُ، وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ "(بُخاری شریف: ۶۴۰۵)
अनुवाद
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जो शख़्स रोज़ाना सौ मर्तबा सुब्हानल्लाही व बिहम्दिही कहे: उसकी सब लग़्ज़िशें माफ़ कर दी जाती हैं, अगरचे वह समन्दर के झाग के बराबर हों।" (तुहफ़त-उल-क़ारी)
हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है:
1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक बिन हिशाम अल-हिमयरी (मृत्यु: 833 हिजरी) की है, जो इब्न इसहाक़ की 'अल-मग़ाज़ी व अस-सियर' के क्रम (तरतीब) से लिखी गई है।...