हदीस अल-रसूल ﷺ

وعن ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَجُلاً لَعَنَ الرِّيحَ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَا تَلْعَنُوا الرِّيحَ فَإِنَّهَا مَاْمُورَةٌ وَإِنَّهُ مَنْ لَعَنَ شَيْئاً لَيْسَ لَهُ بِأَهْلِ رَجَعَتِ اللَّعْنَةُ عَلَيْهِ(مشکوٰۃ المصابیح)
अनुवाद
हज़रत इब्ने अब्बास फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा नबी करीम (ﷺ) के सामने एक शख़्स हवा पर लानत कर रहा था तो आप (ﷺ) ने फ़रमाया कि हवा पर लानत न करो क्योंकि वह तो (रहमत या अज़ाब के लिए) ख़ुदा की जानिब से मामूर है और जो शख़्स किसी ऐसी चीज़ पर लानत करता है जो लानत का हक़दार नहीं होती तो वह लानत उसी लानत करने वाले पर लौट आती है। (तौज़ीहात शरह मिश्कात/जि: ३/स: २१०)
कुत्तों के लिए कुर्बानी न कीजिए खुदारा...!! (ईद-उल-अज़हा की एक झकझोर देने वाली कहानी)
लेख

कुत्तों के लिए कुर्बानी न कीजिए खुदारा...!! (ईद-उल-अज़हा की एक झकझोर देने वाली कहानी)

यह घटना एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ी है। एक पिता की दास्तान सुनिए जो कुर्बानी करने में असमर्थ है। "बाबा.... बाबा .... हमें भी गोश्त मिलेगा ना?" मैंने कहा: "हाँ-हाँ, क्यों नहीं, बिल्कुल मिलेगा।" "लेकिन बाबा ....पिछली ईद पर तो किसी ने भी हमें गोश्त नहीं दिया था, अब तो पूरा साल हो गया है गो...

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