وَعَنْ عَوْفِ بْنِ مَالِكِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَنْ يَجْمَعَ اللَّهُّ عَلَى هَذِهِ الْأُمَّةِ سَيْفَيْنِ سَيْفًا مِنْهَا وَسَيْفًا مِنْ عَدُوِّهَا (رَوَاهُ أَبَوَدَاوُدَ)
अनुवाद
हज़रत औफ़ इब्न मालिक (रज़ि.) कहते हैं कि रसूल करीम (ﷺ) ने फ़रमाया: अल्लाह तआला इस उम्मत के ख़िलाफ़ दो तलवारों को इकट्ठा नहीं करेगा, एक तलवार तो ख़ुद मुसलमानों की और दूसरी तलवार उनके दुश्मनों की। (अबू दाऊद)
तौज़ीह (स्पष्टीकरण): "सैफ़ैन" यानी बैक वक़्त (एक ही समय में) इस उम्मत पर दो तलवारें इकट्ठी नहीं होंगी, अगर दुश्मन से जंग और जेहाद फ़ी सबीलील्लाह होगा तो आपस में जंग नहीं होगी (हाँ अगर मुनाफ़िक़ीन की एक जमात कुफ़्फ़ार से मिल गई तो फिर दो तलवारें जमा होंगी) और अगर दुश्मन से जंग और जेहाद नहीं होगा तो फिर आपस में लड़ेंगे। (तौज़ीहात शरह मिश्कात/जि: ८/स: ११६)