حَدَّثَنَا أَنَسٌؓ قَالَ خَدَمْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَشْرَ سِنِينَ، فَمَا قَالَ لِي أُفٍّ. وَلاَ لِمَ صَنَعْتَ؟ وَلاَ أَلاَّ صَنَعْتَ؟(بُخاری شریف ۶۰۳۸)
अनुवाद
हज़रत अनस (रज़ि.) कहते हैं: मैंने दस साल नबी (ﷺ) की ख़िदमत की, पस कभी आपने मुझसे ऊँ (उफ़) नहीं कहा, और कभी ऐसे काम के लिए जो मैंने किया: "तूने यह काम क्यों किया?" नहीं कहा, और कभी मैंने कोई काम नहीं किया तो "तूने यह काम क्यों नहीं किया?" नहीं कहा। (तुहफ़त-उल-क़ारी)