हदीस अल-रसूल ﷺ

حَدَّثَنَا أَنَسٌؓ قَالَ خَدَمْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَشْرَ سِنِينَ، فَمَا قَالَ لِي أُفٍّ‏.‏ وَلاَ لِمَ صَنَعْتَ؟ وَلاَ أَلاَّ صَنَعْتَ‏؟(بُخاری شریف ۶۰۳۸)
अनुवाद
हज़रत अनस (रज़ि.) कहते हैं: मैंने दस साल नबी (ﷺ) की ख़िदमत की, पस कभी आपने मुझसे ऊँ (उफ़) नहीं कहा, और कभी ऐसे काम के लिए जो मैंने किया: "तूने यह काम क्यों किया?" नहीं कहा, और कभी मैंने कोई काम नहीं किया तो "तूने यह काम क्यों नहीं किया?" नहीं कहा। (तुहफ़त-उल-क़ारी)
बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी
लेख

बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी

किसी ने एक बादशाह को तोहफ़े में शाहीन (बाज़) के दो बच्चे पेश किए। बादशाह ने दोनों को अपने शाहीनों के प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) के सुपुर्द कर दिया ताकि वे उन दोनों को ट्रेनिंग दें कि वे शिकार पर ले जाए जा सकें। एक महीने के बाद वह मुलाज़िम (कर्मचारी) बादशाह के पास हाज़िर हुआ और कहा कि एक शाहीन तो मुकम...

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