हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُولَنَّ أَحَدُكُمُ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي، اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي، إِنْ شِئْتَ‏.‏ لِيَعْزِمِ الْمَسْأَلَةَ، فَإِنَّهُ لاَ مُكْرِهَ لَهُ ‏"‏‏(بُخاری شریف : ۶۳۳۹)
अनुवाद
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: "जब तुम में से कोई दुआ करे तो मज़बूती से मांगे, और हरगिज़ न कहे: ऐ अल्लाह ! आप चाहें तो मुझे दें, आप चाहें तो मेरी बख़्शिश करें, आप चाहें तो मुझ पर मेहरबानी करें, बल्कि मज़बूती से मांगे, क्योंकि उन पर ज़बरदस्ती करने वाला कोई नहीं।" (तुहफ़त-उल-क़ारी)
ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!
लेख

ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!

रवायत है कि सात सौ बरस पहले इस्फ़हान में एक मस्जिद बन रही थी। काम तक़रीबन ख़त्म हो चुका था और कारीगर छोटे-छोटे आख़िरी काम कर रहे थे। एक बूढ़ी औरत का वहाँ से गुज़र हुआ। वह अचानक खड़ी हो गई और मस्जिद के मीनार की जानिब इशारा करके कहने लगी कि यह मेरी नज़र में टेढ़ा नज़र आ रहा है। कारीगर हँसने लगे तो...

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