لا تَدعُوا عَلى أَنْفُسِكُم، وَلا تدْعُوا عَلى أَولادِكُم، وَلاَ تَدْعُوا عَلَى أَمْوَالِكُم، لا تُوافِقُوا مِنَ اللَّهِ سَاعَةً يُسأَلُ فِيهَا عَطاءً، فيَسْتَجيبَ لَكُم رواه مسلم (مشکوۃ المصابیح)
अनुवाद
हज़रत जाबिर (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि हज़रत रसूल अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: "अपनी औलाद, अपने माल और अपनी जान पर बद-दुआ न करो, ऐसा न हो कि अल्लाह की तरफ़ से तुम्हें वह घड़ी मिल जाए जिसमें अल्लाह तआला दुआ को क़ुबूल करता है, पस उसमें तुम्हारी बद-दुआ क़ुबूल हो जाए।" (तफ़हीम-उल-मुस्लिम)