हदीस अल-रसूल ﷺ

لا تَدعُوا عَلى أَنْفُسِكُم، وَلا تدْعُوا عَلى أَولادِكُم، وَلاَ تَدْعُوا عَلَى أَمْوَالِكُم، لا تُوافِقُوا مِنَ اللَّهِ سَاعَةً يُسأَلُ فِيهَا عَطاءً، فيَسْتَجيبَ لَكُم رواه مسلم (مشکوۃ المصابیح)
अनुवाद
हज़रत जाबिर (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि हज़रत रसूल अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: "अपनी औलाद, अपने माल और अपनी जान पर बद-दुआ न करो, ऐसा न हो कि अल्लाह की तरफ़ से तुम्हें वह घड़ी मिल जाए जिसमें अल्लाह तआला दुआ को क़ुबूल करता है, पस उसमें तुम्हारी बद-दुआ क़ुबूल हो जाए।" (तफ़हीम-उल-मुस्लिम)
इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)
लेख

इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज्ञान) के तलबा (विद्यार्थी) हैं। इल्मे शरई (धार्मिक ज्ञान) को अल्लाह तआला ने 'कौले थक़ील' (एक भारी बात) क़रार दिया है। य...

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