عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُحِبُّ الْحَلْوَاءَ وَالْعَسَلَ(بُخاری شریف : ۵۵۹۹)
अनुवाद
नबी (ﷺ) को हलवा (मीठा) और शहद पसंद था (पस अंगूर का शीरा दो तिहाई जला दिया जाए तो वह हलवा बन गया, और पकाए बग़ैर ताज़ा पिया जाए तो वह शहद के मानिंद है)। (तुहफ़त-उल-क़ारी)
फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के मौक़े पर जगह-जगह हुज़ूर रहमतुल लिल आलमीन ﷺ (सारे संसार के लिए दया होने) के जलवे नज़र आते हैं। बल्कि वास्तविकता यह है कि मक्का की विजय का सबसे बड़ा कारण ही वह घटना बनी जिसने आपके दर्दभरे और मानवता-प्रेमी दिल को तड़पा दिया था। सीरत-निगार (जीवनी लेखक) लिखते हैं:
सन् ६...