हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ أَبِي طَلْحَةَ ـ رضى الله عنهم ـ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَدْخُلُ الْمَلاَئِكَةُ بَيْتًا فِيهِ كَلْبٌ وَلاَ تَصَاوِيرُ ‏"‏‏(بُخاری شریف: ۵۹۴۹)
अनुवाद
नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: "फ़रिश्ते ऐसे घर में दाख़िल नहीं होते जिस में कुत्ता या तस्वीर होती हैं।" (तुहफ़त-उल-क़ारी)
मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन
लेख

मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन

लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और सदरुल मुदर्रिसीन (प्रधान शिक्षक) दारुल उलूम देवबंद की वफ़ात (देहांत) के बाद से इस लेख को लिखने के समय तक लेख लिखने का सिल...

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